भारत में मिडिल क्लास इंसान के लिए दो चीजें सबसे ज्यादा रहस्यमयी हैं—पहली, कि कटरीना कैफ ने विक्की कौशल को ही क्यों चुना? और दूसरी, कि आखिर IPO का अलॉटमेंट किसे मिलता है? जब भी कोई Swiggy या Tata जैसा बड़ा IPO आता है, हम भारतीय अपनी बरसों की जमा-पूँजी (और कभी-कभी तो बीवी के गहनों को भी) निकालने को तैयार हो जाते हैं।

हम रात भर जागकर रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) पढ़ते हैं, जैसे अगले दिन UPSC का एग्जाम हो। सुबह उठते ही ‘Apply’ बटन दबाते हैं और फिर शुरू होता है ‘इंतज़ार का इंतकाम’। तीन दिन बाद जब रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपना PAN नंबर डालते हैं, तो स्क्रीन पर लाल अक्षरों में ‘NOT ALLOTTED’ लिखा आता है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने चलती बस से उतार दिया हो।
क्यों आपकी एप्लीकेशन ‘कूड़ेदान’ में जाती है? (The Rejection Logic)
IPO न मिलने के पीछे सिर्फ शनि की ढैया या खराब किस्मत नहीं होती, बल्कि कुछ ऐसी गलतियाँ होती हैं जो हम ‘स्मार्ट’ बनने के चक्कर में कर देते हैं।
1.1 बेमेल डेटा का रायता (Mismatch Data)
इमेजिन कीजिए, आपने अपनी गर्लफ्रेंड को लव लेटर लिखा लेकिन उस पर नाम अपनी पड़ोसन का डाल दिया। क्या होगा? थप्पड़ पड़ेगा! ठीक यही आपके साथ होता है जब आपका Demat Account आपके नाम पर होता है और आप पेमेंट किसी और के (जैसे पापा या भाई के) UPI ID से कर देते हैं।
- सीधी बात: जिस नाम पर डीमैट, उसी नाम का बैंक अकाउंट। वरना सेबी (SEBI) आपका फॉर्म ऐसे फाड़ेगा जैसे पुरानी फ़िल्मों में विलेन वसीयत फाड़ता था।
1.2 कट-ऑफ प्राइस से ‘बेवफाई’
कुछ लोग मार्केट में धनिया भी मोल-भाव करके लेते हैं, और वही आदत IPO में भी लगा देते हैं। अगर कंपनी ने प्राइस बैंड ₹400 से ₹420 रखा है, तो हमारे ‘कंजूस भाई’ ₹405 की बिड लगाएंगे। भाईसाहब, जब डिमांड 100 गुना ज्यादा है, तो कंपनी सस्ते वाले को भाव क्यों देगी?
- ज्ञान की बात: हमेशा ‘Cut-off Price’ (ऊपरी बैंड) चुनें। इसका मतलब है आप ‘VIP’ लाइन में खड़े हैं।
2: अलॉटमेंट के 5 ‘खतरनाक’ हैक्स (The Master Hacks)
अब बात करते हैं उस ‘जादू’ की जो आपको रिजेक्शन की भीड़ से बाहर निकालेगा।
2.1 ‘फैमिली ट्री’ का सही इस्तेमाल (Multiple Accounts Strategy)
एक ही अकाउंट से 10 लॉट के लिए अप्लाई करना वैसा ही है जैसे एक ही कुएं में 10 बार बाल्टी डालना। अगर कुएं में पानी (Share) नहीं है, तो कुछ नहीं मिलेगा।
- हैक: घर के हर बालिग सदस्य का डीमैट अकाउंट खुलवाएं। मम्मी, पापा, भाई, बहन—सबके नाम से 1-1 लॉट अप्लाई करें।
- अपनी सास के नाम पर भी अकाउंट खुलवा लें। कम से कम इसी बहाने उनके नाम से आपकी किस्मत चमक सकती है! याद रखें, 5 अलग PAN मतलब 5 अलग मौके।
2.2 शेयरहोल्डर कोटा: द सीक्रेट डोर
क्या आपको पता है कि बहुत सी बड़ी कंपनियों के IPO में उन लोगों के लिए अलग रास्ता होता है जिनके पास पहले से उस ग्रुप के शेयर हों?
- हैक: मान लीजिए ‘Tata EV’ का IPO आने वाला है। अगर आपके पास ‘Tata Motors’ का एक भी शेयर है, तो आप Shareholder Category में आ जाते हैं। यहाँ भीड़ कम होती है और मिलने के चांस 10 गुना बढ़ जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे मंदिर में जनरल लाइन में 5 घंटे खड़े होने के बजाय ₹500 की वीआईपी टिकट लेकर 5 मिनट में दर्शन करना।
2.3 UPI मैंडेट: द साइलेंट किलर
आधे से ज्यादा लोग इसलिए रिजेक्ट होते हैं क्योंकि उन्होंने ‘Apply’ तो कर दिया, लेकिन अपनी बैंकिंग ऐप (GPay, PhonePe) में जाकर ‘UPI MANDATE’ अप्रूव करना भूल गए।
- टिप: जब तक आपके फोन पर ‘Amount Blocked’ का मैसेज न आए, तब तक समझिये कि आपने सिर्फ हवा में तीर चलाया है। अपनी ऐप के ‘Mandates’ सेक्शन में जाकर उसे अप्रूव करना न भूलें।
3: IPO अलॉटमेंट का गणित (The Mathematics of Allotment)
यहाँ हम थोड़ा ‘सीरियस’ होकर समझेंगे कि पर्दे के पीछे क्या होता है।
3.1 ओवर-सब्सक्रिप्शन का खेल
अगर कोई IPO 50 गुना सब्सक्राइब हुआ है, तो इसका मतलब है कि 50 लोगों में से सिर्फ 1 को शेयर मिलेगा। यह किसी रियलिटी शो के ऑडिशन से भी ज्यादा टफ है।
- लॉटरी सिस्टम: रिटेल कैटेगरी में कोई भेदभाव नहीं होता। चाहे आपने ₹15,000 लगाए हों या ₹2 लाख, सबको बराबर मौका मिलता है। इसलिए बड़े अमाउंट के बजाय छोटे-छोटे अमाउंट अलग-अलग अकाउंट से लगाना ही समझदारी है।
4: वो गलतियाँ जो आपको ‘फकीर’ बना सकती हैं
4.1 लास्ट मिनट रश (The 2:59 PM Syndrome)
कुछ लोगों को थ्रिल पसंद होता है। वो आखिरी दिन के आखिरी मिनट पर बटन दबाते हैं। फिर क्या होता है? सर्वर डाउन, बैंक का सर्वर बिजी, और आपका सपना चकनाचूर!
- सलाह: दूसरे दिन ही अपना दांव खेल दें। पहले दिन रिस्पॉन्स देखें, दूसरे दिन अप्लाई करें।
4.2 गलत कैटेगरी का चुनाव
अगर आप ₹2 लाख से ज्यादा लगा रहे हैं, तो आप HNI (High Networth Individual) बन जाते हैं। यहाँ नियम बदल जाते हैं। यहाँ ‘लॉटरी’ नहीं, ‘प्रो-राटा’ (जितना मांगोगे उसका कुछ हिस्सा) मिल सकता है। लेकिन छोटे इन्वेस्टर के लिए Retail Category ही बेस्ट है।
5: FAQ
- IPO Status Check Kaise Kare? – रजिस्ट्रार (LinkIntime या KFintech) की वेबसाइट पर जाकर।
- क्या रिफंड वापस मिलता है? – हाँ, अगर अलॉटमेंट नहीं मिला, तो ब्लॉक किया गया पैसा 2-3 दिन में ‘Unblock’ हो जाता है।
- ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या है? – यह वह काला बाजारी’ भाव है जो बताता है कि लिस्टिंग पर कितना मुनाफा हो सकता है। (नोट: इस पर आँख मूंदकर भरोसा न करें!)
क्या IPO जुआ है?
अंत में बस इतना कहूँगा—IPO का मिलना आपकी मेहनत और थोड़ी सी चालाकी पर निर्भर करता है। ये टोटके आपके चांस बढ़ा सकते हैं, लेकिन गारंटी कोई नहीं दे सकता। और अगर फिर भी न मिले, तो दिल पर मत लीजिये। मार्केट में 5000 और कम्पनियाँ हैं। कम से कम आपके पैसे तो बच गए, वरना लिस्टिंग पर जब शेयर 20% गिरता है, तो जो ‘मोये-मोये’ वाला दर्द होता है, वो किसी से शेयर भी नहीं किया जा सकता!
⚠️ ज़रूरी चेतावनी (Disclaimer )
भाई देखो, ऊपर बताए गए नुस्खे कोई जादू की छड़ी नहीं हैं कि घुमाया और अलॉटमेंट मिल गया। शेयर बाज़ार में निवेश करना उतना ही रिस्की है जितना बिना हेलमेट के पुलिस वाले के सामने से निकलना। IPO अलॉटमेंट पूरी तरह से ‘ऊपर वाले’ (और रजिस्ट्रार के कंप्यूटर) की मर्जी पर निर्भर है। अगर अलॉटमेंट न मिले, तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है, शायद आपकी कुंडली में शनि भारी है या आपने पिछले जन्म में किसी का पेन चुराया था। निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर (जो आपसे ज़्यादा समझदार हो) से पूछ लें और कंपनी के कागज़ात पढ़ लें। पैसा आपका है, तो रिस्क भी आपका ही होगा!
