भारत का “Export Promotion Mission”: अब हर गली से निकलेगा एक ग्लोबल ब्रांड! (Complete Guide)

​दुनिया का बाज़ार और आपके हाथ में भारत का व्यापार

​क्या आपने कभी सोचा है कि आपके शहर की छोटी सी फैक्ट्री में बना सामान अमेरिका के सुपरमार्केट में या दुबई के बड़े मॉल में बिक सकता है? अगर आपका जवाब “हाँ” है, तो साल 2026 आपके लिए सुनहरे अक्षरों में लिखा जाने वाला साल है। भारत सरकार ने एक ऐसी योजना को हरी झंडी दिखाई है, जो आने वाले समय में देश के व्यापारिक मानचित्र (Trade Map) को पूरी तरह बदल देगी।

🇮🇳 एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन 2026

भारत सरकार ने ₹25,060 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (Export Promotion Mission – EPM) की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन लाखों छोटे और मध्यम व्यापारियों (MSMEs) के लिए एक खुला निमंत्रण है, जो अब तक ग्लोबल मार्केट के नाम से ही घबराते थे।

​भारत सरकार ने ₹25,060 करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (Export Promotion Mission – EPM) की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन लाखों छोटे और मध्यम व्यापारियों (MSMEs) के लिए एक खुला निमंत्रण है, जो अब तक ग्लोबल मार्केट के नाम से ही घबराते थे।

​इस मिशन का सबसे पहला और सबसे धमाकेदार हिस्सा लॉन्च हो चुका है, जिसे हम ‘मार्केट एक्सेस सपोर्ट’ (Market Access Support – MAS) योजना कह रहे हैं। सरल शब्दों में कहें तो, अगर आप अपना माल विदेश में बेचना चाहते हैं, तो सरकार अब आपके लिए ‘रास्ता’ भी बनाएगी, ‘बायर’ भी ढूँढेगी और आपकी जेब का ‘खर्च’ भी कम करेगी।

क्यों पड़ी इस मिशन की ज़रूरत?

​अक्सर हमारे देश के व्यापारी दो चीज़ों से मार खा जाते थे:

  1. महंगी विदेश यात्राएं: बायर से मिलने के लिए विदेश जाना, वहां स्टॉल लगाना और होटलों का खर्च एक छोटे व्यापारी की हिम्मत तोड़ देता था।
  2. जानकारी का अभाव: “माल तो अच्छा है, पर बेचना किसे है?”—यह सवाल किसी भूत की तरह भारतीय व्यापारियों को डराता था।

​इन्हीं समस्याओं का ‘परमानेंट इलाज’ करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय (Department of Commerce) ने कमर कस ली है। इस 2000 शब्दों के विस्तृत गाइड में, हम इस मिशन की एक-एक परत को खोलेंगे। हम जानेंगे कि कैसे आप 35% MSME कोटा का लाभ उठा सकते हैं, कैसे एयरफेयर सब्सिडी आपकी उड़ान को सस्ती बनाएगी, और कैसे आप अगले 5 साल का एडवांस प्लान बनाकर अपने बिजनेस को सात समुंदर पार ले जा सकते हैं।

​चाहे आप एक अनुभवी एक्सपोर्टर हों या सिर्फ एक ऐसा स्टार्टअप जो अपना पहला ऑर्डर तलाश रहा है—यह ब्लॉग आपके लिए एक ‘ग्लोबल बिजनेस गीता’ साबित होने वाला है। चलिए, इस रोमांचक सफर की शुरुआत करते हैं और समझते हैं कि भारत कैसे ‘विश्वगुरु’ के साथ-साथ ‘विश्व-व्यापारी’ बनने की राह पर है।

आखिर ये ‘MAS’ (Market Access Support) क्या बला है?

​अगर मैं आपसे कहूँ कि सरकार आपके लिए एक ऐसी “ग्लोबल सेटिंग” कर रही है जहाँ आपको बस अपना सैंपल लेकर पहुंचना है और खरीदार (Buyers) लाइन लगाकर खड़े होंगे, तो कैसा लगेगा?

MAS यानी Market Access Support स्कीम बिल्कुल यही काम करती है। यह एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) का वो ‘हथियार’ है जिसका इस्तेमाल करके सरकार भारतीय सामान को विदेशी बाज़ारों में घुसने की जगह दिलाएगी।

MAS स्कीम के पीछे का असली खेल (The Strategy)

पुराने ज़माने में एक्सपोर्ट का मतलब होता था—बड़े-बड़े मेलों में जाना और हज़ारों डॉलर खर्च करना। छोटे व्यापारियों के लिए ये “अंगूर खट्टे हैं” वाली बात थी। लेकिन MAS स्कीम ने खेल के नियम बदल दिए हैं:

MAS स्कीम: बिजनेस के नए अवसर 🚀

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बायर-सेलर मीट (BSM)

सरकार खुद विदेशों में इवेंट्स ऑर्गनाइज़ करेगी जहाँ विदेशी खरीदार आएंगे। आपको बस वहां जाकर अपना माल दिखाना है।

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रिवर्स बायर-सेलर मीट (RBSM)

यहाँ सरकार विदेशी खरीदारों को “टिकट और होटल” देकर इंडिया बुलाएगी ताकि वो आपकी फैक्ट्री आएं। ग्राहक खुद चलकर आपके पास आएगा!

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ट्रेड फेयर्स और एग्जीबिशन

दुनिया के सबसे बड़े मेलों में इंडिया का बड़ा पवेलियन होगा, जहाँ आपको स्टॉल के लिए भारी सब्सिडी और सरकारी सपोर्ट मिलेगा।

इसमें नया क्या है? (What’s New in 2026?)

​अजय भादू (एडिशनल सेक्रेटरी, कॉमर्स डिपार्टमेंट) के शब्दों में कहें तो, यह स्कीम अब “डेटा और फीडबैक” पर चलेगी। पहले क्या होता था, लोग सरकारी खर्चे पर घूम आते थे और बिजनेस का अता-पता नहीं होता था। लेकिन अब:

  1. Mandatory Feedback: अगर आप किसी इवेंट में गए हैं, तो आपको ऑनलाइन बताना होगा कि वहां कितने बायर आए और कितने बिजनेस लीड्स जेनरेट हुए।
  2. Predictability (भरोसा): सरकार ने 3 से 5 साल का कैलेंडर जारी करने का वादा किया है। अब आपको आखिरी मिनट पर भागना नहीं पड़ेगा। आपको पता होगा कि 2027 में जर्मनी में मेला है, तो आप अभी से उसकी तैयारी कर सकते हैं।
  3. MSME First Policy: इस स्कीम की सबसे बड़ी ताकत है इसका 35% कोटा। किसी भी डेलिगेशन में कम से कम 35% छोटे व्यापारी ही होंगे। यानी अब “बड़े भाई” छोटे भाई का हक़ नहीं मार पाएंगे।

35% कोटा और सब्सिडी का गणित

​सरकार ने इस स्कीम को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त गाइडलाइन्स तय की हैं। यहाँ उन वित्तीय मदद (Financial Support) की जानकारी है जो एक एक्सपोर्टर के तौर पर आपको मिल सकती है:

MSMEs के लिए 35% आरक्षण (Mandatory Reservation)

​कॉमर्स डिपार्टमेंट की नई नीति के अनुसार, Market Access Support (MAS) के तहत आयोजित होने वाले प्रत्येक ट्रेड डेलिगेशन या प्रदर्शनी में आयोजक (जैसे FIEO या EPCs) को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि:

  • ​कम से कम 35% प्रतिभागी कंपनियां MSME कैटेगरी से हों।
  • ​इसका उद्देश्य यह है कि बड़े एक्सपोर्टर्स के साथ-साथ छोटे और पहली बार एक्सपोर्ट करने वाले (First-time exporters) उद्यमियों को भी ग्लोबल एक्सपोजर मिले।

💰 सब्सिडी और वित्तीय सहायता

योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय मदद को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है:

🏙️ स्टॉल और स्पेस रेंट (Stall Charges)

विदेशी प्रदर्शनियों में स्टॉल का खर्च अब बोझ नहीं बनेगा। MAS के तहत सरकार चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मेलों में स्पेस रेंट पर सब्सिडी प्रदान करती है। यह राशि लागत का एक बड़ा हिस्सा कवर करती है।

✈️ हवाई यात्रा सहायता (Airfare Support)

  • पात्रता: जिनका वार्षिक एक्सपोर्ट टर्नओवर ₹75 लाख से कम है।
  • शर्त: कम से कम 12 महीने की एक्टिव सदस्यता (EPC/FIEO) अनिवार्य है।
  • लाभ: इकोनॉमी क्लास टिकट पर आंशिक रीइम्बर्समेंट दिया जाता है।

📢 मार्केटिंग और ब्रांडिंग

सिर्फ सामान ले जाना ही नहीं, उसे बेचना भी ज़रूरी है। इसके लिए सरकार कैटलॉग प्रिंटिंग, विदेशी बाजारों में प्रोडक्ट मार्केटिंग और डेटा-ड्रिवन पॉलिसी सपोर्ट के लिए मदद देती है।

फोकस मार्केट्स (Strategic Prioritization)

​सरकार ने इस स्कीम के तहत “New Geographies” (नए भूगोल) को प्राथमिकता दी है। इसका मतलब है कि यदि आप लैटिन अमेरिका, अफ्रीका या सीआईएस (CIS) जैसे उभरते बाजारों में एक्सपोर्ट करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको प्राथमिकता दी जाएगी।

फीडबैक और ट्रैकिंग (Outcome Measurement)

​यह जानकारी पूरी तरह प्रामाणिक है कि अब हर इवेंट के बाद अनिवार्य ऑनलाइन फीडबैक (Mandatory Online Feedback) देना होगा। इसमें आपको बताना होगा:

  • ​खरीदारों की गुणवत्ता (Buyer Quality) कैसी थी?
  • ​कितने बिजनेस लीड्स (Business Leads) उत्पन्न हुए?
  • ​मार्केट की प्रासंगिकता (Market Relevance) क्या थी?

5-Year Event Calendar और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया

​सरकार ने अब “तदर्थ” (Ad-hoc) प्लानिंग को खत्म कर दिया है। वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) ने अब Predictability यानी स्थिरता पर जोर दिया है।

5-वर्षीय इवेंट कैलेंडर (The Roadmap)

​वाणिज्य विभाग के अनुसार, अब प्रमुख मार्केट एक्सेस इवेंट्स का 3 से 5 साल का एडवांस कैलेंडर तैयार किया जाएगा।

  • फायदा: इससे एक्सपोर्टर्स और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPCs) को अपनी भागीदारी पहले से प्लान करने का समय मिलेगा।
  • मंजूरी: इस कैलेंडर को सरकार द्वारा एडवांस में मंजूरी दी जाएगी ताकि फंड्स की उपलब्धता सुनिश्चित रहे।

डिजिटल टूल्स और ट्रैकिंग

​इस योजना को पूरी तरह से डिजिटल बनाया गया है।

  • लीड ट्रैकिंग: एक्सपोर्टर्स को जो बिजनेस लीड्स (Potential Buyers) मिलेंगे, उनकी ट्रैकिंग के लिए डिजिटल टूल्स दिए जाएंगे।
  • मार्केट इंटेलिजेंस: सरकार सहभागी एजेंसियों के माध्यम से मार्केट डेटा शेयर करेगी ताकि आप जान सकें कि किस देश में किस उत्पाद की मांग सबसे ज्यादा है।

रजिस्ट्रेशन और आवेदन कैसे करें?

​यदि आप इस स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इन चरणों का पालन करना होगा:

  1. IEC (Import Export Code) प्राप्त करें: यह एक्सपोर्ट बिजनेस की पहली शर्त है। बिना वैध IEC के आप किसी भी सरकारी स्कीम का हिस्सा नहीं बन सकते।
  2. संबंधित EPC/FIEO की सदस्यता: आपको अपने सेक्टर से जुड़ी Export Promotion Council (EPC) या FIEO का सदस्य होना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, यदि आप कपड़े का बिजनेस करते हैं, तो AEPC (Apparel Export Promotion Council) की सदस्यता ज़रूरी है।
  3. पोर्टल पर आवेदन: MAS स्कीम के तहत होने वाले इवेंट्स की जानकारी Indian Trade Portal और संबंधित काउंसिल की वेबसाइट पर दी जाती है।
  4. पात्रता की जांच: आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करें कि आप MSME कैटेगरी में रजिस्टर्ड हैं (Udyam Registration के जरिए), क्योंकि 35% कोटा वहीं से लागू होगा।

यह भारत के एक्सपोर्ट के लिए नया सवेरा है?

​₹25,060 करोड़ का यह Export Promotion Mission (EPM) सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं है, बल्कि ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने का एक ब्लूप्रिंट है। Market Access Support (MAS) इसका पहला कदम है, जो सीधे उन रुकावटों को हटाता है जो एक छोटे व्यापारी को विदेश जाने से रोकती थीं।

​फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने इसे “रणनीतिक कदम” कहा है क्योंकि यह पहली बार एक्सपोर्ट करने वालों और छोटे उद्यमियों की लॉन्ग-स्टैंडिंग डिमांड को पूरा करता है।

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