कल्पना कीजिए… आप हवा में 35,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहे हैं। बाहर बादलों का शानदार नज़ारा है, लेकिन आपका पूरा ध्यान अपने फोन की उस आखिरी 2% बैटरी पर टिका है। आप अपनी सीट से ‘योद्धा’ की तरह ढाल (पावर बैंक) निकालते हैं और जैसे ही केबल लगाने वाले होते हैं, तभी केबिन क्रू की आवाज़ आती है— “सर/मैम, रुक जाइए! यह गैर-कानूनी है।”
जी हाँ, अब वह दौर गया जब आप फ्लाइट को अपना चलता-फिरता चार्जिंग स्टेशन समझते थे। भारत के विमानन नियामक DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने नए साल 2026 की शुरुआत में ही एक ऐसा नियम जारी किया है, जो शायद आपके फोन को तो नहीं, लेकिन आपकी यात्रा की आदतों को ज़रूर ‘शॉक’ दे देगा।
असल में मामला क्या है?
सिर्फ मज़ाक से हटकर बात करें, तो अब भारत में हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक का इस्तेमाल करना या उससे फोन चार्ज करना पूरी तरह बैन कर दिया गया है। इतना ही नहीं, अब आप अपने पावर बैंक को अपनी पसंद की किसी भी जगह (जैसे ऊपर वाले केबिन में) नहीं ठूंस सकते। इसके पीछे कोई ‘बैटरी से दुश्मनी’ नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा का एक बड़ा कारण है।
हाल ही में इंडिगो और एयर बुसान जैसी फ्लाइट्स में पावर बैंक के ‘बम’ की तरह फटने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। तो अगर आप भी अपनी अगली ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें, वरना एयरपोर्ट सिक्योरिटी पर आपका कीमती पावर बैंक सिर्फ़ एक ‘यादगार’ बनकर रह जाएगा!
- घर से चार्जिंग: हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपने सभी उपकरणों को 100% चार्ज करें।
- कैपेसिटी चेक: केवल उन्हीं पावर बैंक को साथ रखें जिनकी क्षमता 100Wh (लगभग 27,000mAh) से कम हो।
- ब्रांडेड उत्पाद: बिना लेबल वाले या सस्ते पावर बैंक का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वे फटने के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
- आपातकालीन स्थिति: यदि आपका डिवाइस गर्म हो रहा है, तो बिना डरे तुरंत केबिन क्रू को बताएं।
