क्या मृत्यु के साथ ही खत्म हो जाती है क्रेडिट कार्ड की देनदारी?

क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस की भूमिका

क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस (Credit Shield) की भूमिका

ज्यादातर प्रीमियम और कुछ बेसिक क्रेडिट कार्ड्स के साथ एक सुरक्षा कवच आता है, जिसे ‘क्रेडिट शील्ड’ (Credit Shield) कहा जाता है। यह एक प्रकार का बीमा (Insurance) है जो विशेष रूप से कार्ड धारक की मृत्यु या विकलांगता जैसी अनहोनी स्थितियों के लिए बनाया गया है।

1. यह कैसे काम करता है?

जब किसी कार्ड धारक की मृत्यु होती है, तो ‘क्रेडिट शील्ड’ सक्रिय हो जाती है। इस स्थिति में, कार्ड का जो भी बकाया (Outstanding Balance) होता है, उसका भुगतान बीमा कंपनी करती है, न कि मृतक का परिवार या वारिस।

2. क्रेडिट शील्ड के मुख्य लाभ:

  • कर्ज से मुक्ति: परिवार को अचानक आए वित्तीय बोझ से राहत मिलती है।
  • संपत्ति की सुरक्षा: बैंक को मृतक की छोड़ी गई संपत्ति (जैसे बैंक बैलेंस या घर) को जब्त करने या उसमें से पैसा काटने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • शांतिपूर्ण समाधान: वारिसों को बैंक के रिकवरी एजेंटों और कानूनी नोटिसों से जूझना नहीं पड़ता।

3. बीमा का लाभ कैसे उठाएं? (दावा प्रक्रिया)

बीमा का लाभ अपने आप नहीं मिलता, इसके लिए परिवार को कुछ कदम उठाने होते हैं:

  • समय पर सूचना: मृत्यु के 30 से 60 दिनों के भीतर (बैंक की पॉलिसी के अनुसार) बैंक को सूचित करना अनिवार्य है।
  • दस्तावेज जमा करना: बीमा क्लेम फॉर्म के साथ ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ (Death Certificate) और बैंक द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज जमा करने होते हैं।
  • पॉलिसी चेक करें: परिवार को मृतक के पुराने बैंक स्टेटमेंट देखने चाहिए। यदि उसमें ‘Insurance Premium’ या ‘Credit Shield Fee’ नाम से कोई छोटी राशि कट रही थी, तो इसका मतलब है कि बीमा मौजूद है।

4. ध्यान रखने योग्य बातें (Limitations)

  • कवरेज की सीमा: हर बीमा की एक अधिकतम सीमा (Limit) होती है। उदाहरण के लिए, यदि बीमा 5 लाख तक का है और बकाया 7 लाख है, तो बीमा कंपनी केवल 5 लाख देगी।
  • कारण की जांच: कुछ मामलों में, यदि मृत्यु आत्महत्या या पहले से मौजूद किसी गंभीर बीमारी के कारण हुई है, तो बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर सकती हैं।
प्रो-टिप: कार्ड बंद करवाने से पहले हमेशा बैंक से लिखित में पूछें कि “क्या इस कार्ड पर कोई सक्रिय बीमा या क्रेडिट शील्ड कवर मौजूद था?” कई बार बैंक खुद से यह जानकारी नहीं देते।

जीवन अनिश्चितताओं से भरा है, और अक्सर पीछे छूटे हुए परिवार के लिए आर्थिक उलझनें सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। जब किसी परिवार का सदस्य दुनिया छोड़कर जाता है, तो दुःख की इस घड़ी में एक बड़ा सवाल सिर उठाने लगता है— “उनके पीछे छोड़े गए कर्जों का क्या होगा?”
खासकर क्रेडिट कार्ड, जो आज हमारी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है, अक्सर अपनी चमक-धमक के पीछे एक बड़ा ‘आउटस्टैंडिंग बैलेंस’ (बकाया राशि) छोड़ जाता है। आम लोगों के मन में अक्सर यह धारणा होती है कि इंसान की मृत्यु के साथ ही उसका क्रेडिट कार्ड का बिल भी खत्म हो जाता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? क्या बैंक उस पैसे को छोड़ देते हैं, या फिर उस कर्ज का बोझ मृतक के जीवनसाथी या बच्चों के कंधों पर डाल दिया जाता है?
आज के इस ब्लॉग में हम इसी गंभीर विषय की गहराई में उतरेंगे। हम जानेंगे कि भारतीय बैंकिंग नियमों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड होल्डर की मृत्यु होने पर कानूनी तौर पर पैसा भरने की जिम्मेदारी किसकी होती है और बैंक वसूली के लिए किन रास्तों को अपनाते हैं।
इस प्रस्तावना की खूबियाँ:

क्या कानूनी वारिस बिल चुकाने के लिए उत्तरदायी है?

​जब किसी क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु होती है, तो बैंक अक्सर बकाया वसूली के लिए परिवार से संपर्क करते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कानून आपकी कितनी और कैसी जिम्मेदारी तय करता है।

1. व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अभाव (No Personal Liability)

​भारतीय कानून के अनुसार, क्रेडिट कार्ड एक ‘अनसिक्योर्ड लोन’ (Unsecured Loan) है। इसका मतलब है कि बैंक ने यह कार्ड व्यक्ति की आय और साख (Credit Score) पर दिया था, न कि किसी संपत्ति को गिरवी रखकर।

  • नियम: मृतक का कानूनी वारिस (पति/पत्नी, बच्चे या माता-पिता) अपनी जेब या अपनी निजी संपत्ति से इस बिल को चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। बैंक आपको अपनी व्यक्तिगत बचत से भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

2. विरासत में मिली संपत्ति की सीमा (Liability limited to Inherited Estate)

​भले ही आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी न हो, लेकिन मृतक की ‘एस्टेट’ (Estate) यानी उनकी छोड़ी गई संपत्ति कर्ज चुकाने के लिए उत्तरदायी होती है।

​ऐसी कुछ विशेष स्थितियाँ हैं जहाँ जिम्मेदारी वारिस पर आ सकती है:

4. बैंक की जबरन वसूली के खिलाफ अधिकार

​आरबीआई (RBI) के सख्त निर्देश हैं कि बैंक वसूली के लिए परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकते।

  • ​यदि बैंक के रिकवरी एजेंट आपको डराते हैं या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो आप Banking Ombudsman (बैंकिंग लोकपाल) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

किन स्थितियों में बैंक पैसा वसूल सकता है?

​यद्यपि क्रेडिट कार्ड एक ‘अनसिक्योर्ड लोन’ है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें बैंक बकाया राशि की वसूली कर सकता है। ये स्थितियाँ निम्नलिखित हैं:

1. विरासत में मिली संपत्ति से (From the Estate/Assets)

​बैंक का पहला अधिकार मृतक की छोड़ी गई संपत्ति पर होता है। यदि मृतक के नाम पर कोई संपत्ति है, तो बैंक कानूनी वारिसों से कह सकता है कि वे उस संपत्ति को बेचकर या उसमें से बिल चुकाएं।

  • इसमें क्या-क्या शामिल है?: बैंक खाते में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), शेयर, सोना या अचल संपत्ति (मकान/जमीन)।
  • नियम: वारिसों को केवल उतनी ही राशि चुकानी होगी जितनी संपत्ति उन्हें मिली है।

2. जॉइंट अकाउंट होल्डर होने पर (Joint Account Holders)

​यदि क्रेडिट कार्ड ‘जॉइंट’ (संयुक्त) रूप से लिया गया था, तो मुख्य कार्ड धारक की मृत्यु के बाद जिम्मेदारी दूसरे धारक (Co-applicant) पर आ जाती है। इस स्थिति में बैंक जीवित व्यक्ति से पूरी बकाया राशि वसूलने का हकदार होता है।

3. एड-ऑन कार्ड (Add-on Card) का उपयोग

​अगर परिवार का कोई सदस्य मृतक के नाम पर जारी ‘एड-ऑन’ कार्ड का उपयोग कर रहा है, तो मुख्य कार्ड धारक की मृत्यु के बाद भी कार्ड का उपयोग करना कानूनी रूप से गलत हो सकता है। यदि मृत्यु के बाद कार्ड से कोई ट्रांजेक्शन किया गया है, तो बैंक उस व्यक्ति से वसूली करेगा जिसने कार्ड का इस्तेमाल किया है।

4. सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (Secured Credit Cards)

​कुछ लोग FD (Fixed Deposit) के बदले क्रेडिट कार्ड लेते हैं।

  • स्थिति: यदि कार्ड धारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक को किसी वारिस से पूछने की जरूरत नहीं पड़ती। वे सीधे उस FD को भुनाकर अपना बकाया काट लेते हैं और बचा हुआ पैसा नॉमिनी को दे देते हैं।

5. गारंटर या को-साइनर (Guarantor or Co-signer)

​दुर्लभ मामलों में, जहाँ कार्ड के लिए किसी ने गारंटी दी हो, बैंक उस गारंटर से पैसे की मांग कर सकता है।

महत्वपूर्ण टिप: यदि मृतक ने ‘क्रेडिट शील्ड’ (Credit Shield) या कोई बीमा लिया हुआ था, तो बैंक को बीमा कंपनी से पैसा वसूलना चाहिए, न कि परिवार से। परिवार को बैंक से इस बीमा के बारे में जरूर पूछना चाहिए।

क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस (Credit Shield) की भूमिका

​ज्यादातर प्रीमियम और कुछ बेसिक क्रेडिट कार्ड्स के साथ एक सुरक्षा कवच आता है, जिसे ‘क्रेडिट शील्ड’ (Credit Shield) कहा जाता है। यह एक प्रकार का बीमा (Insurance) है जो विशेष रूप से कार्ड धारक की मृत्यु या विकलांगता जैसी अनहोनी स्थितियों के लिए बनाया गया है।

1. यह कैसे काम करता है?

​जब किसी कार्ड धारक की मृत्यु होती है, तो ‘क्रेडिट शील्ड’ सक्रिय हो जाती है। इस स्थिति में, कार्ड का जो भी बकाया (Outstanding Balance) होता है, उसका भुगतान बीमा कंपनी करती है, न कि मृतक का परिवार या वारिस।

2. क्रेडिट शील्ड के मुख्य लाभ:

  • कर्ज से मुक्ति: परिवार को अचानक आए वित्तीय बोझ से राहत मिलती है।
  • संपत्ति की सुरक्षा: बैंक को मृतक की छोड़ी गई संपत्ति (जैसे बैंक बैलेंस या घर) को जब्त करने या उसमें से पैसा काटने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • शांतिपूर्ण समाधान: वारिसों को बैंक के रिकवरी एजेंटों और कानूनी नोटिसों से जूझना नहीं पड़ता।

3. बीमा का लाभ कैसे उठाएं? (दावा प्रक्रिया)

​बीमा का लाभ अपने आप नहीं मिलता, इसके लिए परिवार को कुछ कदम उठाने होते हैं:

  • समय पर सूचना: मृत्यु के 30 से 60 दिनों के भीतर (बैंक की पॉलिसी के अनुसार) बैंक को सूचित करना अनिवार्य है।
  • दस्तावेज जमा करना: बीमा क्लेम फॉर्म के साथ ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ (Death Certificate) और बैंक द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज जमा करने होते हैं।
  • पॉलिसी चेक करें: परिवार को मृतक के पुराने बैंक स्टेटमेंट देखने चाहिए। यदि उसमें ‘Insurance Premium’ या ‘Credit Shield Fee’ नाम से कोई छोटी राशि कट रही थी, तो इसका मतलब है कि बीमा मौजूद है।

4. ध्यान रखने योग्य बातें (Limitations)

  • कवरेज की सीमा: हर बीमा की एक अधिकतम सीमा (Limit) होती है। उदाहरण के लिए, यदि बीमा 5 लाख तक का है और बकाया 7 लाख है, तो बीमा कंपनी केवल 5 लाख देगी।
  • कारण की जांच: कुछ मामलों में, यदि मृत्यु आत्महत्या या पहले से मौजूद किसी गंभीर बीमारी के कारण हुई है, तो बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर सकती हैं।

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