1 फरवरी से महंगा होगा धुआं: सिगरेट पर भारी टैक्स!
भारत के करोड़ों सिगरेट उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खबर के साथ हुई है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू करने का फैसला किया है।
सिगरेट की लंबाई के अनुसार नई दरें:
| लंबाई (Length) | नई एक्साइज ड्यूटी (प्रति 1000 स्टिक) |
|---|---|
| 64 mm से कम | ₹2,050 |
| 75 mm से अधिक | ₹8,500 |
इस बड़े बदलाव की मुख्य बातें:
- दोहरी मार: 1 फरवरी से प्रभावी होने वाला यह टैक्स मौजूदा 40% GST के ऊपर लगेगा।
- लंबाई का आधार: टैक्स का निर्धारण सिगरेट की लंबाई के अनुसार ₹2050 से ₹8500 के बीच किया गया है।
- WHO मानक: सरकार वर्तमान 53% टैक्स को WHO के 75% मानक के करीब लाना चाहती है।
- कानूनी आधार: यह संशोधित सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल 2025 के तहत लागू किया जा रहा है।
नई टैक्स व्यवस्था और कीमतों पर असर (Price Impact)
1 फरवरी 2026 से प्रभावी होने वाली यह व्यवस्था सिगरेट की लंबाई (Length) पर आधारित है। सरकार ने इसे अलग-अलग ‘स्लैब’ में बांटा है। वर्तमान में लागू 40% GST के ऊपर यह अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी एक ‘कंपाउंडिंग इफेक्ट’ पैदा करेगी, जिससे खुदरा कीमतों (MRP) में भारी उछाल आना तय है।
सिगरेट की लंबाई के अनुसार टैक्स की दरें
नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि आपकी पसंदीदा सिगरेट की श्रेणी पर कितना टैक्स लगेगा:
| सिगरेट की श्रेणी (Length) | नई एक्साइज ड्यूटी (प्रति 1000 स्टिक) |
|---|---|
| 64 mm से कम | ₹2,050 |
| 65 mm – 70 mm | ₹2,850 |
| 70 mm – 75 mm | ₹4,500 |
| 75 mm से अधिक (प्रीमियम) | ₹8,500 |
कीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी (अनुमानित)
- किफायती सिगरेट (Small/Regular): जो सिगरेट अभी ₹10-12 में मिलती है, उसकी कीमत में ₹1 से ₹1.50 की वृद्धि हो सकती है।
- स्टैंडर्ड सिगरेट (King Size): वर्तमान में ₹18 वाली सिगरेट की कीमत बढ़कर ₹21 से ₹22 तक जा सकती है।
- प्रीमियम सेगमेंट: लंबी सिगरेट के एक पैक (10 स्टिक) पर ₹30 से ₹50 तक की सीधी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
कंपनियों की रणनीति
ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसी दिग्गज कंपनियां अब अपनी ‘पैकिंग साइज’ में बदलाव कर सकती हैं। संभव है कि कीमतें बहुत ज्यादा न बढ़ाकर वे एक पैकेट में सिगरेट की संख्या कम कर दें या स्टिक की लंबाई में मामूली कटौती करें ताकि वे निचले टैक्स स्लैब में आ सकें।
शेयर बाजार विश्लेषण: तंबाकू कंपनियों के निवेशकों में डर क्यों?
जैसे ही वित्त मंत्रालय ने नई एक्साइज ड्यूटी की अधिसूचना जारी की, भारतीय शेयर बाजार में तंबाकू क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। ITC, जो भारतीय सिगरेट बाजार के लगभग 75% हिस्से पर कब्जा रखती है, के निवेशकों के लिए यह खबर एक बड़े झटके की तरह आई।
शेयरों पर तत्काल असर
| कंपनी का नाम | शेयर में गिरावट (अनुमानित) | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| ITC Limited | ▼ 6% – 9% | राजस्व (Revenue) में कमी की आशंका |
| Godfrey Phillips | ▼ 12% – 15% | मार्जिन पर भारी दबाव |
| VST Industries | ▼ 4% – 7% | मांग में संभावित गिरावट |
निवेशक क्यों चिंतित हैं?
1. वॉल्यूम ग्रोथ में गिरावट
कीमतों में ₹2-₹3 की वृद्धि से ‘कैजुअल स्मोकर्स’ अपनी खपत कम कर सकते हैं।
2. अवैध व्यापार का खतरा
ऊंचे टैक्स के कारण स्मगलिंग वाली सिगरेट का बाजार बढ़ने का डर है।
3. मार्जिन पर दबाव
टैक्स का पूरा बोझ ग्राहकों पर न डाल पाने की स्थिति में मुनाफा घटेगा।
4. ब्लॉक डील का असर
बड़े निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली (ब्लॉक डील) ने बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ा है।
क्या यह ‘Buy the Dip’ का मौका है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ITC का बिजनेस मॉडल मजबूत है क्योंकि उनके पास FMCG और होटल्स का भी बड़ा पोर्टफोलियो है। सिगरेट एक ‘Inelastic’ उत्पाद है, इसलिए कीमतों में बढ़ोत्तरी के बावजूद लंबी अवधि में मांग वापस आने की उम्मीद रहती है।
